इलाहाबाद हाईकोर्ट ने माना है कि 1980 की एक हत्या में दोषी ठहराए गए दो व्यक्ति उस समय नाबालिग थे और मामले को किशोर न्याय बोर्ड को भेज दिया।

स्रोत: द हिंदू (पुनर्लिखित)